नमन तुम्हें हे बाबा साहब, भारत भाग्य विधाता,
नमन हे भारत-रत्न! जनों के नायक गुण निधि दाता।
हे प्रखर ज्ञान के युगद्रष्टा,युग-युग तक तेरा मान रहे,
जब तक गंगा-यमुना जल हो, तब तक तेरा गुणगान रहे।
तूने कलम उठाई ऐसी, सत्ता भी झुकती जाती थी,
अन्यायों की ऊँची दीवारें, पल भर में ढह जाती थीं।
शोषित, दलित, उपेक्षित जन को, जीने का अधिकार दिया,
संविधान की अमर ज्योति से, भारत को आधार दिया।
ना करना किसी से बैर सिखाया, न ही किसी से द्वेष किया,
समता, न्याया बंधुत्व आदि का, जन जन में संदेश दिया।
बोले—"शिक्षित बनो, संगठित हो, संघर्षों से मत घबराना,
ज्ञान और साहस के बल पर, भाग्य स्वयं का स्वयं बनाना।"
नारी को सम्मान मिले, श्रमिको को भी अधिकार मिले,
ऐसा सुंदर भारत हो, जिसमें हरेक जन को प्यार मिले।
धर्म नहीं जो भेद सिखाए, धर्म वही जो मानवता हो,
जाति-पाँति की जंजीरों से, मुक्ति का संसार मिले।
तेरी लेखनी की ताकत से, लोकतंत्र मुस्काता है,
तेरे लिखे संविधान पर, भारत शीश झुकाता है।
जब-जब कोई अन्याय करेगा, तेरी वाणी याद आएगी,
हर पीड़ित की आँखों में फिर, आशा की ज्योति जग जाएगी।
आओ मिलकर आज शपथ लें, तेरे सपनों का देश बनाएं,
नफरत की हर आग बुझाकर, प्रेम और समता अपनाएं।
यही तुम्हें सच्ची श्रद्धांजलि, यही हमारा सम्मान रहे,
भारत की अमरता के संग संग में, बाबा तेरा नाम रहे।
हे संविधान के शिल्पकार,युगदृष्टा बाबा साहेब,
भीमाबाई के रत्न देश के उद्धारक,दुख निवारक।
बारंबार प्रणाम तुम्हे,अंजाना करता नहीं थके,
नाम तुम्हारा इस धरती पर सदा के लिए अमर रहे।
-सबा लाल "अंजाना"
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