आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

चंद्रयान

                
                                                         
                            आज छूने चला भारत चाँद का माथा,
                                                                 
                            
दोहराई जाएगी युगों-युगों तक यह गाथा...

मिशन मून असफल नहीं हो रहा था,
जब चन्द्रयान- 2 का प्रक्षेपण हुआ था...

ऐ विश्व सुनलो हम कम नहीं हैं,
यह ना समझना कोई दम नहीं है...

सम्भाली कमान देश की दुर्गा ने,
चाँद सावन में भोले को करने अर्पण चली हैं...

प्रज्ञान, विक्रम महानवीर पहुँचे,
साथ गीता तिरंगा जो लेकर चले थे...

आज भर लेंगे हम चाँद आंँखों में अपना,
स्वप्न पूरा हुआ जैसे कोई अपना...

टीम ISRO से सीखे कोई प्रतीक्षा में तपना,
साध लक्ष्य को अपने फिर निशाने पर रखना...

स्वावलंबन के धागों से बुना भारत का सुदृढ़ संकल्प,
देखता विश्व आज देखो पूरा हुआ है...
-सोनाली तिवारी"दीपशिखा"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर