"मैं नारी हूं"
1) जो पैदा होने से पहले ही कोख में मारी जाती है।
जो बेकसूर कहलाकर भी इस विकट सजा को पाती है।।
क्या हूं में लाचार वहीं ओर क्या में वहीं बेचारी हूं?
मैं फिर भी कहती हूं हंसकर, में मारी हूं, में नारी हूं।।
2) जिसके पढ़ने पर इस जग में, भूचाल सा इक आ जाता है।
जो खुलकर हंस से कभी कहीं तो सन्नाटा छा जाता है।
मैंने ही सजाया ये जग है, किर क्यों मैं नहीं तुम्हारी हूं?
क्या दोष है मेरा इतना ही, में नारी हूं, मैं नारी हूं।।
3) बचपन से ही क्यों हर कोई बस मुझको यही बताता है?
दो कुल की इज्जत हांथो में, ये TAG लगाया जाता है।
क्यों जबरन इज्जत दी जाती है? क्या में कोई भिखारी हूं?
या दोष मेरा बस इतना है में नारी हूं, मैं नारी हूं।।
4) जो आया यौवन मुझपर तो, इक मोह रचाया जाता है।
फिर शादी करके बच्चों को मुझे दिया थमाया जाता है।
दे दी जाती है जिम्मेदारी,, क्या मैं कोई रखवाली हूं?
या दोष मरा बस इतना है, में नारी हूं, मैं नारी हूं।।
5) मेरे पीछे ही क्यों है जग? क्यों मुझे संभाला जाता है?
हैवानों के हाथों में फिर क्यो दिया थमाया जाता है?
क्यों करते हो ignore मुझे? क्या मैं जिम्मेदारी हूं?
या दोष मेरा बस इतना है मैं नारी हूं, मैं नारी हूं।।
नारी वास्तव में क्या है?
6) मैं पद्मावती, मैं अवंतिका, मैं रानी लक्ष्मी बाई हूं।
जब जब ललकारा दुश्मन ने, मैं कुरुक्षेत्र में आई हूं।।
ना लेना मुझसे लोहा तुम, मै इक तलवार पुरानी हूं।
तुम ना समझो कमजोर मुझे मैं नारी हूं, मैं नारी हूं।।
7) मैं लक्ष्मी हूं, मैं दुर्गा हूं, और मैं ही काली माई हूं।
दुष्टों का करने को विनाश, मैं इस संसार में आई हूं।।
ना लेना हल्के में मुझको, मैं इस धरती से भारी हूं।
तुम ना समझो कमजोर मुझे मैं नारी हूं, मैं नारी हूं।।
8) मैं हिम्मत हूं, मैं साहस हूं, मैं सूर्य की इक चिंगारी हूं।
मैं खंजर हूं, मैं चाबुक हूं, मैं तेज धार की आरी हूं।।
मैं नहीं हूं कोई साधारण, मैं जग को जनने वाली हूं।
तुम ना समझो कमजोर मुझे, में नारी हूं, मैं नारी हूं।।।
- शेख सोहिल मंसूरी
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