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हम परदेसी

                
                                                         
                            हम हैं परदेसी, परदेस में हमें रहना है
                                                                 
                            

भूलकर गाँव की गलियाँ,
चंद गज का अपना ठिकाना है,
हँसते हुए भी दिल के अंदर
एक दर्द पुराना है।

घर के शुद्ध पकवानों में
सौ नुक्स निकालने वाले,
आज बासी खाने को भी
व्यंजन समझकर खाना है।

हम हैं परदेसी, परदेस में हमें रहना है।

सिर्फ सिरदर्द के बहाने पर
पूरा परिवार खिदमत में रहता था,
आज बड़े से बड़े हादसे की
खबर भी चुपचाप सहना है।

अपनों की चिंता दिल में रखकर
चेहरे पर मुस्कान सजानी है,
दूर रहकर भी परिवार की खातिर
हर मुश्किल से लड़ जाना है।

हम हैं परदेसी, परदेस में हमें रहना है।

खुद के घर जाने के लिए भी
अब अनुमति लेनी पड़ती है,
ऐसी अपनी जिंदगी है,
ऐसी ही अपनी कहानी है।

कोई अपना पास नहीं है,
परिवार से दूर अकेलापन है,
भीड़ भरी इस दुनिया में भी
तन्हा-तन्हा जीवन बिताना है।

हम हैं परदेसी, परदेस में हमें रहना है।

सोनू कहे—हिम्मत रखो,
मेहनत को अपना साथी बनाओ,
परदेस की इस राह में
खुद को हर दिन मजबूत बनाओ।

हिम्मत और मेहनत का जज़्बा है
तो परदेस में भी रवानी है,
वरना इस भीड़ में इंसान की
तन्हा ही अपनी जिंदगानी है।

घर की यादें दिल में रखकर
अपने सपनों को सजाना है,
आज भले ही दूर हैं अपनों से,
कल लौटकर घर भी जाना है।

हम हैं परदेसी, परदेस में हमें रहना है,
हँसते-हँसते दर्द छुपाकर,
अपनों के लिए जीना है।
 
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7 घंटे पहले

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