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                            प्रेम-मैत्री के प्रतिमान -
                                                                 
                            
अपेक्षा,
निश्छलता,
हास्य विनोद,
भावनाओं का सम्मान।

होने लगे जब इनका भान -
उपेक्षा,
छल,
व्यंग,
भावनाओं का अपमान;

हो सावधान,
समझ लो अवसान,
उस प्रीति का
जिस पर था गुमान।
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2 वर्ष पहले

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