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ब्लेन्हिम के बाद

                
                                                         
                            ब्लेन्हिम के बाद
                                                                 
                            
(रॉबर्ट सदी की प्रसिद्ध कविता ‘आफ्टर ब्लेन्हिम’ का हिन्दी अनुवाद )

गरमी की एक शाम को,
बूढा कैस्पर, काम खत्म कर,
बैठा था धूप सेंकता
झोपड़ी के दुआर पर;
और हरी घास पर खेल में लीन,
थी नन्हीं पोती विल्हमीन।

देखा भाई पीटरकीन को,
लुढ़काता लाता कुछ गोल बड़ा;
खेल खेल में नदी किनारे
जो था उसके हाथ लगा।
पूछा क्या है, बड़ा जो इतना,
गोला सा, और कितना चिकना।

लेकर उसके हाथ से
जो खड़ा था उत्तर जानने,
बूढ़े कैस्पर ने सिर हिलाया
फिर लिया निःश्वास उसने,
“हुआ था जिसके जीवन का अवसान
कपाल है उसका, वह थी विजय महान।

“मिलते कितने बाग़ में,
क्योंकि, हैं ढेरों यहाँ पर;
जब भी जाता खेत जोतता,
बाहर निकलते हल से टकराकर!
कि, हुए थे हजारों जिसमें बलिदान,
वही तो थी, वह विजय महान।”


“हमें बताओ क्या था वह सब”,
बोला छोटा पीटरकीन जोर से;
नन्हीं विल्हमीन ने ऊपर देखा,
आश्चर्य भरी उन अखियों से;
“उस युद्ध के बारे में हमें बताओ,
"लड़े थे वे एक-दुसरे से क्यों”

“वे थे अंग्रेज़”, कैस्पर बोला,
“रौंदा जिन्होंने फ्रेंच को;
यह मालूम नहीं पर,
लड़े थे वे, आपस में क्यों;
लेकिन, सब होठों पर था यह गान,
कि वह थी, वह थी, विजय महान।

“तब रहते थे वे ब्लेनहिम में
मेरे पिता, उस नदी किनारे;
जब घर को उनके आग लगी,
जान बचाकर भागे बेचारे;
साथ में बच्चा और पत्नी,
सिर पर कोई आश्रय नहीं।

“आग और तलवार से
हुआ दूर दूर तक देश बरबाद
मर गयी कितनी गर्भवती माएं,
और कितने ही नवजात;
पर बच्चों, यह होता सामान्य,
जब भी होती विजय महान।

“कहते हैं था दृश्य भयावह
उस जीत के बाद;
हजारों शव थे पड़े हुए,
सड़ांध पहुँचाती आघात;
पर यह सब तो होता सामान्य
जब भी होती कोई विजय महान।

“सर्वत्र प्रशंसा इन दोनों की -
ड्यूक मार्लब्रो, और प्रिंस यूजीन”।
“लेकिन, यह तो बुरा काम था! फिर क्यों!”
बोली नन्हीं विल्हमीन।
“न..न.. बिटिया, उसे बुरा न मान,
मेरी प्यारी, वह थी एक विजय महान।

“इस बड़ी लड़ाई को जिसने जीता
उस ड्यूक का सबने स्तवन किया”
“पर इसमें,” बालक पीटरकीन ने पूछा,
“वह अच्छा क्या था जो प्राप्त हुआ”
“अब यह कह पाना तो नहीं आसान
पर निश्चित थी वह विजय महान। ”

 (अनुवादक - डॉ स्कन्द शुक्ल, प्रयागराज)
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3 वर्ष पहले

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