मादक रंग उमंग जोशीला,
छलके मधुराई सबकी बोली में।
लगें चेहरे मवाली नयन बवाली,
सबकी चाल बदल गई है होली में।।
मित्रों बहुत मजा है होली में।
बुढऊ दादा पर फिर चढी जवानी,
लेते मजा बहुओं से मुंहबोली में।
गदराए अंग पर रंग फेंकते,
निशाना साधकर महिला टोली में।।
मित्रों बहुत मजा है होली में।
छुट्टे साँड़ से बच्चे घूम रहे,
लिए रंग अबीरा झोली में।
चेहरों पर जैसे पेंट चढवाए,
रंग डालें सीधे चोली में।।
मित्रों बहुत मजा है होली में।
क्या महल अटारी झोपड़पट्टी,
चंग भंग छन रही खोली में।
छोरे छोरियों में हुडदंग मचा,
ले रहे मजा रंग और रोली में।।
मित्रों बहुत मजा है होली में।
मित्र शत्रु मित्रतवत मिल रहे,
मस्त रंग रगड़ते दिलजोली में।
सबकी बहू भावज हो गईं ,
लगाते रंग अंग ठिठोली में।।
मित्रों बहुत मजा है होली में।
भंग छंग ठंडाई छन रही,
ले खुशमंद नशा मझोली में।
शराबियों की आज पौ बारह है,
मन मुदित मजा भरें झोली में।।
मित्रों बहुत मजा है होली में।
ना हारी सब भूले बीमारी,
ना मजा दवा की गोली में।
नरवशाए दिल खोल मिल रहे,
भरते गोरियों को कोली में।।
मित्रों बहुत मजा है होली में।
झख मारें यदुवंशी तिलक लगाए,
इन्हें मजा हंसी दिलजोली में।
फाड़ पैजामा लोग नाडे़ में घूम रहे,
अजब गजब मजा बकलोली में।।
मित्रों बहुत मजा है होली में।
श्रीकांत यादव
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