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पवनपुत्र हनुमान

                
                                                         
                            जहाँ राम का नाम गूँजता,
                                                                 
                            
वहाँ तुम्हारा वास है,
हे अंजनी के लाल, तुम्हीं में,
भक्ति का विश्वास है।

संकट चाहे कितना गहरा,
तुम राह दिखाते हो,
टूटे हुए हृदयों में भी,
आशा दीप जलाते हो।

पर्वत को तुम उठा लाए,
सागर को लाँघ गए,
राम काज की खातिर तुम तो,हर सीमा से पार गए।

न धन माँगा, न मान माँगा,
न कोई अभिमान रखा,
राम चरणों में अपना जीवन,
तुमने सदा समर्पित रखा।

तुम बल हो, तुम भक्ति हो,
तुम साहस की पहचान,
तुमसे ही जग जानता है,
सेवा का सच्चा ज्ञान।

जब मन डर से काँप उठे,
बस तेरा नाम पुकारूँ,
जय बजरंगबली कहते ही,
हर भय को दूर निहारूँ।

तेरी कृपा की छाँव मिले तो,
काँटों में भी फूल खिलें,
तेरे नाम की ज्योति से बाबा,
अँधियारे सब दूर मिलें।

हे महावीर, हे बजरंगी,
रखना अपनी शरण में,
राम नाम बसता रहे सदा,
मेरे मन के हर कण में।
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3 घंटे पहले

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