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दशहरे की जीत

                
                                                         
                            सोने की लंका जलती जाए, राम नाम की ज्योत जगमगाए, झूठ मिटे और सच मुस्काए, दशहरा खुशियों का पर्व मनाए।
                                                                 
                            
रावण का अभिमान जले, मन में प्रेम के फूल खिलें, क्रोध, कपट का अंत हो जाए, हर दिल में विश्वास पले।
राम के तीरों में सत्य की शक्ति, सीता की गरिमा, लक्ष्मण की भक्ति, धर्म की राह पर जो भी चलता, उसके संग रहती प्रभु की शक्ति।
दस सिर वाला रावण जलता, मन का रावण फिर भी पलता, बाहर पुतला फूँक रहे हैं, भीतर अहंकार क्यों नहीं ढलता?
आओ मिलकर शपथ ये खाएँ, मन के सारे दोष मिटाएँ, सत्य, प्रेम और धर्म की राह पर, जीवन का हर दीप जलाएँ।
बुराई हारे, अच्छाई जीते, हर आँगन में खुशियाँ रीते? नहीं, खुशियों की वर्षा हो, हर चेहरे पर हँसी सजे, रामराज्य का स्वप्न हमारा, हर दिल में साकार बने।
जय श्री राम का नाद सुनाएँ, प्रेम और सद्भाव बढ़ाएँ, विजयादशमी यही सिखाए, सत्य की राह पर कदम बढ़ाएँ।
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1 hour ago

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