आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ये हॉस्टल वाले इतने बदनाम क्यूं हैं

                
                                                         
                            वाकिफ नहीं हो थोड़ा संभल कर रहना
                                                                 
                            
करती है मनमानियां देखते रहना
बचा कर रखना सामान अपने
नजदीकियों से ज्यादा थोड़ा दूरियां रखना
इतने बदनाम क्यों है यह हॉस्टल वाले ?
बिगड़ जाती है लड़कियां जाकर जहां
भूल जाती है सपनों को चमक में वहां
बचा कर रखना विचार अपने उन विचारों के बीच
रखना दूरियां व्यवहारों की वहां
सुनकर अनगिनत नकारात्मक विचार
मेरे मन में ठहर से गए बहुत से सवाल
इतने बदनाम क्यों है यह हॉस्टल वाले ?
क्या सच में यह स्वतंत्रता का कमाल है
यह सच इससे भी कहीं दूर है...
खोजने अपने हजारों सवालों के जवाब
मैं भी पहुंची महिला छात्रावास
इतने बदनाम क्यों हैं ये हॉस्टल वाले?
दिखा विभिन्नता का दृश्य मुझे
हर कोई मशरूफ था जीने में आज
ऐसा नहीं था की कोई हो बहुत गलत
या कोई हो बहुत खास.....
देखकर माहौल समझ आया
बस कुछ ऐसे हाल ......
कोई व्यस्त है भविष्य के सवालों में,
तो कोई कैद की बेड़ियों से हुआ है अभी आजाद
लगा मुझे, किसी के लिए है ये एक सुनहरा मौका
तो कोई कर रहा खुलकर जीने का प्रयास!
दे दिया जाय बदनामी का एक खिताब
अब इतने भी बर्बाद नहीं हैं ये हॉस्टल वाले।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर