कि क्या खूब होता के उनसे हिज्र की हाथों में लकीर ना होती,
हम बसा तो लेते ख्वाब आंखों में अगर उनकी तस्वीर ना होती |
शायरा - राधा चौहान
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X