पूर्व से उगते सूरज को देख,
सूर्यमुखी ने सर झुकाई।
देख गाँव की सुन्दरता को,
जीव-जन्तु भी हर्षाए।
हरी-भरी घाँसे भी,
किरणों को देख उठ आई।
बाँस पर पड़ी ओस बूँदों को देख,
लगा की तारे वसुधरा पर छाई।
हिमालय की पवन ने भी,
जन-मन के जीवन को हर्षाई।
गेहूँ और सरसों के फूलों ने भी,
हरील-सुवर्ण है बिखराई।
रात में जुगनू ने भी,
नन्हीं किरण है फैलाई।
देख अँधेरी रात को
उल्लू भी है हर्षाई।
चाँदनी रातों ने भी,
रजनी किरण है फैलाई।
इसकी दूरी को देख,
लोरियों ने भी मामा बतलाई।
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