इंद्र चेले आए हैं
नीर के मोती लाए हैं
ऊर्जा सा चमकाये हैं
देख दादुर भी हर्ष ध्वनि सुनाएं हैं
कृषक से बतलाए हैं
फसल क्षेत्र लहराये हैं
बंजर को जीना सिखाए हैं
धूसर में हरित बिखराए हैं
देखो इंद्र कृष्ण चेले आए हैं
है असित सा रंग इनका
ना है कोई समीचीन ढंग
दिखते जैसे मखमल के थल ,
यह इंद्र चेले ले लाए हैं जल
दिखाते कभी श्वेत,
कभी कृष्णा मखमल
देखो इंद्र चेले आए हैं
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