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तुम्हारी गोद तुम सबको भर लेती हो

                
                                                         
                            गंगा
                                                                 
                            
गंगा तुम स्त्री हो
ओ गंगा तुम बहती क्यों हो
इतना सब सहती क्यों हो
सब तुम्हारे अंदर आकर
मिलते हैं तुम्हारे किरदार से
रोकर सब धो जाते हैं
अपने पाप तुम्हारे प्यार से
तुम जो निर्मल हो ,तो क्या हुआ
सब कचरा भर लोगी आलिंगन में
ओ गंगा ..
ओ गंगा ..
तुमको कौन सहारा देगा
जब तुम होगी उफान पे
ईश्वर भी आते हैं तुम्हारी गोद में
जब इंसान क्रूर मन भर जाता है
खंडित कहकर संबोधित करते हैं भगवान को
तुम्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता
अच्छे बुरे इंसान से
ओ गंगा ..
ओ गंगा ..
तुम सबको रख लेती हो गोद में
ओ गंगा तुम इतना सहती क्यों हो
मृत्यु भी तुमसे हो पवित्र
जन्म भी तुमसे पवित्र होती है।
तुम कितनी पवित्र स्त्री हो
तुम कितनी सुंदर हो

ओ गंगा..
ओ गंगा..
सब सहकर भी बहती हो
गर तुम न होती तो कहां जाते
कैसे धोते पाप
कैसे होते कर्म पवित्र
कैसे जीवन जीते मर जाते तुम विन
कैसे जीब जंतु तुम विन रह पाते
ओ गंगा
ओ गंगा
पूजा बाद ईश्वर भी आते हैं
तुम्हारी गोद तुम सबको भर लेती हो
आंचल में तुम न होती कमजोर
कितना बड़ा ह्रदय तुम्हारा
हर लेती सब रोग
ओ गंगा
ओ गंगा..
~शिखा सिंह
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2 सप्ताह पहले

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