पैदा होते हैं जिसके ना गूंजी खुशी की किलकारी
वह है नारी
मात-पिता की लाडली ना बन सकी बेचारी
वह है नारी
हर चीज से उसको पीछे हटाया गया नारी होने का एहसास कराया गया
शिक्षा में भी पूर्ण न करने दी भागीदारी परिवार में मातम छाया गया
जब पैदा होती है नारी
हर पीड़ा सहकर भी वह बुत सी खड़ी रही अपने अपमान के खिलाफ वह कुछ भी न बोल सकी
अपने हक की बात करने पर उसको दबाया गया
और ज्यादा कुछ कहने पर उसे डरा कर घर में ही बैठाया गया
बहुत सह चुकी पीड़ा अब इसके सम्मान की बारी है
वह बेचारी नहीं वह हारी नहीं
वह मजबूत कंधों वाली नारी है
घर में भेदभाव की पीड़ा सही
ससुराल वालों ने दहेज की बुरी बात
कही
उसे स्कूटर, फ्रिज, कार लाने के लिए सताया गया
कमजोर समझ नारी का कोमल बदन आग में जलाया गया
देश में जब नारी सशक्तिकरण का बिगुल बजाया गया,
तब हर नारी को आगे बढ़ाया गया
अपने सपनों को साकार करने का हक जब दिलाया गया
कुछ लोगों द्वारा इसका फायदा भी उठाया गया
समझकर अबला नारी
उनको खूब सताया गया
बस, ऑटो, रिक्शा, मेट्रो, ऑफिस,
राह चलते उसे चढ़ाया गया
आगे कदम जब जब उसने रखा
तब तब उस पर जुल्म ढाया गया
इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री बन
नारी में चेतना जगाई,
अंतरिक्ष में जाकर कल्पना चावला ने भारत की शान बढ़ाई,
सुषमा स्वराज विदेश मंत्री बन
अlपनी संस्कृति का मान बढ़ाया
गीता और बबीता ने पहलवानी कर
छोरों को भी चित कर दिखलाया
इन सब से प्रेरणा ले अब आगे हमें बढ़ना है
अब नहीं है बेचारी जिसके पैदा होते ही ना गूंजे खुशी के किलकारी
शिखा दलाल करती है समाज से हाथ जोड़कर प्रार्थना
अब हमें एक साथ एकजुट हो एक दूसरे से है जुड़ना
अब बारी है हौसलों को बुलंद कर कामयाबी के कदम छूने की छूने की
चलो आज लेते हैं प्रण
करेंगे इनकी रक्षा हर क्षण
इन वायदों को पूरा करने की अब हमने कसम खानी होगी
तभी तो हर घर की नारी
की अपनी एक कामयाबी की कहानी उसी की जुबानी होगी
---शिखा दलाल
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