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मुझे थोड़ा सा आकाश चाहिए

                
                                                         
                            संघर्ष से पूर्ण अवकाश चाहिए
                                                                 
                            
मुझे थोड़ा सा आकाश चाहिए

आँखों में रहा सपनों का डेरा
चारों ओर रहा घनघोर अंधेरा
बिता ली जागकर काली रातें
पर दिन को तो प्रकाश चाहिए
मुझे थोड़ा सा आकाश चाहिए

मेहनत की आग में जला हूँ मैं
किस्मत से ही सदा छला हूँ मैं
आँखों में धुंधला चुके हैं सपने
फिर उम्मीद जगाने काश चाहिए
मुझे थोड़ा सा आकाश चाहिए

हँसता खेलता चेहरा था कभी
उदासी लिए है मुस्कराता अभी
खुद की पहचान भुला बैठा हूँ
खुद को ढूँढ़ती तलाश चाहिए
मुझे थोड़ा सा आकाश चाहिए

पेपर लीक से गुज़रा कई दफा
व्यवस्था से रहा हमेशा ख़फ़ा
कभी बिकीं सीटें कभी घोटाले
हुकुमत से मिली न कभी वफ़ा
अब न चाहिए आश्वासन कोई
हर गुनाह का पर्दाफाश चाहिए
मुझे थोड़ा सा आकाश चाहिए

कानून का सख़्त मोहपाश चाहिए
सलाखों में हरेक बदमाश चाहिए
जो देती है गुनाहगार को सुरक्षा
ऐसी व्यवस्था का विनाश चाहिए
मुझे थोड़ा सा आकाश चाहिए

अब न कोई निराश चाहिए
न कोई ज़िदगी से हताश चाहिए
सबको मिले संघर्ष से सफलता
देश का ऐसा विकास चाहिए
मुझे थोड़ा सा आकाश चाहिए

ज़िद पर अबतक अड़ा हूँ मैं
नागफनी बनकर खड़ा हूँ मैं
उम्मीद लिए भटकता फिरता
मुझे वीराने में पलाश चाहिए
मुझे थोड़ा सा आकाश चाहिए
मुझे थोड़ा सा आकाश चाहिए

 
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4 घंटे पहले

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