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मन में है हलचल

                
                                                         
                            मन में है हलचल,
                                                                 
                            
ठहरा हुआ है जल,

बढ़ने लगा रिसाव,
आशंका प्रति पल,

प्रकृति के अनुरूप,
नदी बहे कल-कल,

मर्यादित व्यवहार,
ख़तरा जाये टल,

अमर्यादित कृत्य,
हो जैसे दल-दल,

छोड़ो अंधी दौड़,
मीठा इसका फल,

जागरूक सरकार,
है भविष्य उज्जवल,

'गुंजन' मन को फेर,
तब निकलेगा हल,
-शशि भूषण मिश्र 'गुंजन'*
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45 मिनट पहले

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