हे भारत-माता! शत-शत नमन हमारा,
तेरे चरणों में अर्पित जीवन यह सारा।
हिमगिरि तेरी भाल-रेखा, सागर चरण पखारे,
गंगा-यमुना की पावन धारा महिमा उचारे।
माटी तेरी चंदन-सी, कण-कण पुण्य पुकारे,
वीरों ने बलिदान दिए, तेरी कीर्ति निखारे।
ऋषियों की तप-भूमि तू, ज्ञान-ज्योति की धारा,
तेरी संस्कृति अमर रहे, जग में यश हो न्यारा।
खेतों में हरियाली हो, वन-उपवन मुसकाएँ,
श्रम के दीप जलें घर-घर, मंगल-गीत सुनाएँ।
भेद-भाव सब दूर हों, प्रेम बने आधार,
एक तिरंगा, एक हृदय, एक रहे संसार।
सत्य, धर्म, न्याय-पथ पर जीवन हो समर्पित,
माँ! तेरा अभिनंदन, श्रद्धा-सुमन अर्पित।
जब तक साँस रहे तन में, तेरा मान बढ़ाएँ,
भारत-माता! तेरे चरणों में सदा शीश झुकाएँ।
- श्री सनातन मुकुंद
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