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बादल भैया : बालगीत

                
                                                         
                            बादल भैया नभ में आए, रुई-से कोमल गात।
                                                                 
                            
टिप-टिप बूँदें बरसाकर, लाए सुख-सौगात॥

मलयानिल संग इठलाते, छेड़ें मधुर मल्हार।
तृषित धरा पुलक उठी, पाकर जल-उपहार॥

मोर पखेरू पंख पसारे, थिरके बारंबार।
कोयल पंचम स्वर में गाए, महके गुलज़ार॥

कल-कल बहती सरिता,
झर-झर झरे नीर॥
फूल बिखेरें मधु-सुगंध, हँसता हर वन-तीर॥

दामिनि दमके क्षणभर नभ में, गूँजे मेघ-मृदंग।
इन्द्रधनुष की रंग-पिटारी, बिखराए नव उमंग॥

तितली रंग समेटे उड़ती, भँवरा गाए गान।
कागज़ की नौका ले दौड़ें, हँसते नन्हे प्राण॥

आम्र-विटप की डाली झूले, बोले पिक मनमीत।
सावन बनकर गाए प्रकृति, जीवन का संगीत॥

आओ मिलकर वृक्ष लगाएँ, रखें धरा की शान।
बादल हर सावन बरसाएँ, जीवन का वरदान॥

- श्री सनातन मुकुंद
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4 घंटे पहले

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