ख़िज़ाँ के फूल में, रंग अभी बाक़ी है !
उम्र ढल चुकी, उमंग अभी बाक़ी है !
हसरतें न हो सकीं पूरी तो क्या हुआ
इस ज़िन्दगी की, जंग अभी बाक़ी है !
न हुईं कभी उल्फतों की बारिशें, पर
दिल के दरिया में, तरंग अभी बाक़ी है !
कितनों ने साथ छोड़ा ग़म नहीं “मिश्र”
सफ़र में ख़ुदा का, संग अभी बाक़ी है !
शांती स्वरूप मिश्र
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