भारत- भू का अनुपम खंड
अपना प्यारा झारखंड
इसकी छटा निराली है
दिशी- दिशी में हरियाली है
मनमोहक इसकी सुषमा
किससे दूं इसकी उपमा
जैसे सर में कमल सदंड
अपना प्यारा झारखंड
सुरभित तन पर हरित वसन
झनकाती नूपुर झनझन
बालाएं सुन वंशी तान
द्रुतगति से करतीं प्रस्थान
भर उर में कामना प्रचंड
अपना प्यारा झारखंड
कर में धारे तीर- कमान
वन- वन ज्यों फिरते श्रीराम
खुली देह नंगी चट्टान
युवजन बन खालिस इंसान
हैवानों को देते दंड
अपना प्यारा झारखंड
वनपांखी गाते सस्वर
झरना झरते झर-झर-झर
जलद घुमड़ते मनभावन
हर -हर बम गुंजित सावन
भक्ति राग आनंद अखंड
अपना प्यारा झारखंड
पावन यह धरती कानन
नदियों का अद्भुत संगम
छिन्नमस्तिका नागेश्वर
रावणेश औ शुम्भेश्वर
नमन करूं तज कर पाखंड
अपना प्यारा झारखंड
कान्हो सिद्धो भैरव चांद
बिरसा में थी शक्ति अगाध
बलिदानी वीरों की धरती
दाता सब दिन पत्थर परती
याचक सप्तदीप नवखंड
अपना प्यारा झारखंड
शैलेंद्र राम
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