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कमरा नहीं है

                
                                                         
                            घर बड़ा और सुंदर है
                                                                 
                            
भगवान का मंदिर अंदर है
अन्न धन दूध और भरा दही है
पर मां बाप के लिए कमरा नहीं है।

मां बाप ने न होने दी कमी
आंखों में न आने दी नमी
वो पिता जो चिलचिलाती धूप रहा
बारिश और कड़कती ठंड सही है
पर आज उनके लिए कमरा नहीं है।

जो मां रोज आखिर में खाई
बच्चों को हर खुशी दिलाई
हर दुख उसके अचरा में कहीं है
पर आज उनके लिए कमरा नहीं है।
-शैलबाला कुमारी
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3 घंटे पहले

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