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मेरे रब तू शाहनवाज़ है

                
                                                         
                            मेरे रब तू ज़र्रानवाज़ है, हाकिमों का हाकिम *शाहनवाज़* है।
                                                                 
                            
गुनाहगार बंदों को तू खुदाबख्श दे
वो तुझसे दूर हो या तेरे खलील हो।
काले हों, गोरे या हुस्नों जमील हों

तेरा नाम बड़ा आला, बहुत ज़ीशान है
तू बड़ा रहीम बड़ा मेहरबान है।

अहद है सिफत तेरी तू बड़ा बेनियाज़ है
आयत ए कुरआन में तू सरफ़राज़ है।
मेरे रब तू ज़र्रानवाज़ है, हाकिमों का हाकिम शाहनवाज़ है।

तेरी हम्द करते हैं अबाबील ओ शाहीन
हर दम कोशां हैं फरोगे तब्लीगे दीन।
जाँ भी वार दूँ तुझपे या रब्बुल आलमीन

हर शय में झलकती है तेरी कारीगरी।
हिम्मते फारूकी जज्बाए हैदरी
जिहादे अकबर हो या जिहादे असगरी।
मेरा सर हाज़िर है, मेरा तन हाज़िर है
मेरा मन हाज़िर है, ये जिगर हाजिर है ।
हाजिर तेरे आगे तख्तो ताज है।
तू हाकिमों का हाकिम शाहनवाज़ है।

तेरे अर्श पे सज्दानशीं है नसीम
पूरे आलम पे छाई रहमते मुबीन।
तेरे राज़ से क़ासिर है इन्सां की अक़्ले सलीम
तेरी रहमत से आलम में फैले गुले शमीम।
मैं गफलतों की ज़ुल्मत में फंसा हूं
मौला मुझे दिखा दे सिराते मुस्तक़ीम।

मुस्तफ़ा का मुबारक दीन मेरे सीने में उतार दे
जिब्राईल अमीन ओ मुहम्मद सा मुझे प्यार दे।
शहज़ादा मुझे जन्नत का बना दे
कर दे मेरे सीने में कलमा मुक़ीम।

तेरे हुक्म से तुलुअ शम्स मुनव्वर सिराज है
मेरे रब तू ज़र्रानवाज़ है
हाकिमों का हाकिम शाहनवाज़ है।

आई जोश में रहमते बरी
पानी पे फैला दी अर्ज़े दरी।
इन्सां को पैदा किया बे मिसल
फ़रिश्तों को बख्शी है नूरी शक्ल।
जिन्नों इन्स को बख्शी अक़्ल
हिसाब इन्हीं से होगा महशर में कल।
जलवानुमा होंगे अर्श पे अज्ज वा जल।

समझता जो अपने को माबूद हो
फिरौनियत जिस दिल में मौजूद हो।
फिर वो क्यूं ना दुनिया से नाबूद हो
शैतान की तरह ज़लील ओ मर्दूद हो।

शैतान के गले लानत का तौक डाल
जन्नत से दिया उसको निकाल।
साँप का छीना फिर हुस्नों जमाल
मोर को जन्नत दिया काबुल में डाल।

आदम से भी लिया छीन वकार
सीलोन के बयाबां में दिया उतार।
हव्वा को जद्दा में पहुंचा दिया
यूँ सबको धरती पे फैला दिया।

रोते हैं आदम जारो कतार
बन गई आंसुओं से नदिया की धार।
बीत यूँ ही गए महीनों हजार।
सुनी फिर रब ने आदम की पुकार।
दूर हुआ फिर हर ऐतराज़ है।
किया ख़िलाफ़त से आदम को सरफराज है।
तू निहायत रहमदिल और बख़्शीशनवाज़ है।
हाकिमों का हाकिम शाहनवाज़ है।
-अश्क़ फ़तेहपुरी
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2 घंटे पहले

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