माफ़ करना…
हर छोटी बात
तुमसे कहने की आदत थी।
हर एहसास में
बस तुम्हारा ही ज़िक्र होता था।
माफ़ करना…
तुम्हारे देर से आने वाले जवाब पर
मैं ख़ामोश हो जाती थी।
शायद इसलिए क्योंकि
तुम मेरे लिए सिर्फ़ एक इंसान नहीं,
मेरी आदत बन गए थे।
माफ़ करना…
हर परेशानी में
मैंने तुम्हें ही ढूँढा।
तुम्हारी मौजूदगी को ही
अपना सुकून समझ बैठी।
माफ़ करना…
अगर कभी मेरी मोहब्बत
तुम्हें बंधन लगी हो।
मेरा इरादा तुम्हें रोकना नहीं था…
बस एक डर था—
कहीं तुम भी
उन लोगों की तरह
छोड़कर न चले जाओ।
और आख़िर में…
माफ़ करना…
मैंने तुम्हें जितना अपना माना,
शायद उतना
तुमने मुझे नहीं माना।
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