त्योहारों का मौसम आया कौन करे तैयारी
खेतों मे अनाज नही जिसकी किस्मत है मारी।
पसीना इसने खूब बहाया
लेकिन कुछ काम न आया।
आसमां ने दुख बरसाया
ना पैसा ना अनाज मिल पाया।
त्योहारों का कोई अर्थ नही है
अर्थ बिना जीवन को अर्थ नहीं है।
कैसे मै खुशी मनाऊ मेरा किसान है लाचार
खुशियाँ कम है दुखों की है भरमार।
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