तेरी साड़ी में उलझा सावन
आज फिर दिल पे उतरा सावन
तेरी आँचल की भीगी खुशबू
मेरी रूह का पहला सावन
तेरे पल्लू ने छू लिया जिस पल
बादलों का भी ठहरा सावन
तेरी जुल्फों से बूंद क्या फिसली
झूम कर गा उठा ये सावन
तू जो आकर करीब बैठी तो
दिल ने चुपके से ओढ़ा सावन
तेरी चूड़ी की मीठी खनक सुन
भूल बैठा है रास्ता सावन
तेरे होने से ही समझा हूं
इश्क होता है किस तरह सावन
मैने मौसम बहुत देखे हैं
पर तेरे जैसा न देखा सावन
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