मुलायम , ठंडी और मीठी हो तुम
कैसे बताए एकदम लस्सी हो तुम
खुशबू में घुली मन में बसी
जैसे अमृत की चुस्की हो तुम
मलाई की परत , कोमल सा रूप
भीतर से ठंडी , सुकून से भरी
गिलास में सजकर जब आती हो तुम
कैसे बताए एकदम लस्सी हो तुम
मिट्टी की मटकी , स्वाद में खास
हर घूंट में जैसे ताजगी का एहसास
सौरव के दिल में कब से अटकी हो तुम
कैसे बताए एकदम लस्सी हो तुम
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