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मेरे अंदर आग है

                
                                                         
                            मेरे अंदर है गंगा की तेज धार
                                                                 
                            
हूं मैं जवान तेज तर्रार
जैसे तीक्ष्ण तलवार
है मेरे अंदर आग
जलती लगातार
है मेरे अंदर तप त्याग
कहो जला दूं किसको?
कहो जी ला दूं किसको?
कहो अमृत पी ला दूं किसको?
मैं बागी बलिया का सपूत
मैं बागी बैरिया का देवदूत
कहो सरकार हिला दूं?
कहो भूडोल ला दूं?
कहो ला दूं, बवंडर?
है जलती आग अंदर
मेरे बोलो बनूं चतुर चितेरे?
उठता मैं भोरे भोरे तड़के सवेरे
बोलो,देश द्रोहियों घनेरे!
बोलो, विद्रोह के स्वर गूंजते मेरे
संध्या और सवेरे
मैं एक सुंदर हिंदुस्तान चाहता हूं
मैं विकसित हिंदुस्तान चाहता हूं
मैं बलिया का गौरव गान चाहता हूं
मैं पूरा पाकिस्तान चाहता हूं
मैं पूरा अफगानिस्तान चाहता हूं
मैं पूरा ब्लूचिस्तान चाहता हूं
मैं पूरा अक्साई चिन चाहता हूं
मैं पूरा तिब्बत व चीन चाहता हूं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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22 घंटे पहले

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