मन रे ! खुद को संभाल ।।
धीर-धीरे वक्त का मरहम
करेगा जख्मों का दर्द कम ।
दर्द बढेगा, मत लाना
उसकी बे-वफ़ाई का ख्याल ।।
मन रे ! खुद को संभाल ।।
मेरा प्रेम बस प्रेम था
तनिक न छल फ़रेब था ।
उजड गया भरोसे का चमन,
बिखर गई डाल डाल ।।
मन रे ! खुद को संभाल ।।
-सत्यपाल सिंह
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