इस लुटे हुए प्रेम पथिक की
बस यही ख्वाहिश बाकी है
कि चलते-चलते हो जाएँ
कभी-कभी दीदार उस चेहरे के
जिसे देखती हैं मन की आँखे
रात-रात भर जागते हुए
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