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ख्वाहिश बाकी है

                
                                                         
                            इस लुटे हुए प्रेम पथिक की
                                                                 
                            
बस यही ख्वाहिश बाकी है
कि चलते-चलते हो जाएँ
कभी-कभी दीदार उस चेहरे के
जिसे देखती हैं मन की आँखे
रात-रात भर जागते हुए
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7 महीने पहले

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