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एक शहर में दो मौसम

                
                                                         
                            एक शहर में दो मौसम ।
                                                                 
                            

कहीं सूखी सडकें उड़ती धूल ।
कहीं मेघा बरसे झम झम झम ।।

कहीं पेड़ों से झरते सूख पत्ते ।
कहीं पत्तों पर तैरती शबनम ।।

कहीं बचपन के संग खेले बुढ़ापा ।
कहीं आश्रम में रहने का गम ।।

कहीं करें स्वागत कहकर लक्ष्मी ।
कहीं उदास चेहरे छाये मातम ।।

कहीं जिंदगी को गले लगाती जिंदगी ।
कहीं भीड़ में फटते मानव बम ।।

कहीं आंखों से बहते दर्द के आँसू ।
कहीं ख़ुशी से होती आँखे नम ।।

कहीं गैर बनते जीने की आशा ।
कहीं अपनों पे अपनों का सितम ।।

कहीं चेहरों पर पाने की खुशी ।
कहीं दिल में खोने का गम ।।

एक शहर में दो मौसम ।

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4 वर्ष पहले

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