एक मच्छर ही काफी है
एक मच्छर ही काफी है,
रात भर जगाने के लिए ।
पूरी रात भी कम है,
कमबख्त को भगाने के लिए ।।
छुपकर वार नहीं करता,
बेखौफ, गाते बजाते आता है ।
कोई बताए वह निष्ठुर गवैया,
कौन से राग में गाता है ?
रियाज दिन भर करता है,
रात में सुनाने के लिए ।।
प्राणी छोटा पर सोच बड़ी,
भेदभाव से नफरत करता है ।
बच्चे, बूढ़े, नर, नारी, युवा,
प्रेम सबसे बराबर करता है ।
पास आते ही हो जाए आतुर,
आत्मीयता दिखाने के लिए ।।
-सत्यपाल सिंह
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