दोस्ती का सफ़र
किसी रेलगाड़ी के सफ़र सा नहीं ।
कि सहूलियत के मुताबिक बदली
और मंज़िल पर पहुंच गए ।।
-सत्यपाल सिंह
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X