अब और न खून की नदियां बहाओ ।
आसमां वाले का कुछ खौफ खाओ ।।
कब तलक चलोगे गैरो की बताई राह पर ।
अपनी जिंदगी के खुद रहनुमा बन जाओ ।।
पडे है कदम जिन राहों पर तुम्हारे ।
खत्म होती है अंधेरी गुफाओं में, लौट आओ ।।
खेल, जो तुम खेल रहे हो, खतरनाक है ।
इसमें जीत कर भी हार है समझ जाओ ।।
-सत्यपाल सिंह
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X