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आओ फिर बच्चे बन जाएं

                
                                                         
                            आओ फिर बच्चे बन जाएँ
                                                                 
                            
अच्छे थे, अच्छे बन जाएँ
झूठ, द्वेष, फरेब से अनजान
सच्चे थे, सच्चे बन जाएं ।।
आओ फिर बच्चे बन जाएं ।।

हम सबके प्यारे दुलारे थे,
सबकी आंखों के तारे थे ।
कोई न था गैर पराया
हम सबके, सब हमारे थे ।।
महका दें फ़ज़ा को प्रेम-इत्र से
ऐसे चमन सुमन बन जाएं ।।
आओ फिर बच्चे बन जाएं ।।

सारा जहॉ गुलिस्तान बने
हर आदमी बाग़बान बने ।
निश्छल मन हो निर्मल सोच
इंसान सिर्फ इंसान बने ।
भाईचारे का जो दे संदेश
ऐसी मिसाल किस्से बन जाएं ।।
आओ फिर बच्चे बन जाएं ।।
-सत्यपाल सिंह
 
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5 महीने पहले

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