अजीब रिश्ते हैं,
इंसानों के इंसानों से ।
सुकून भी हासिल है,
इन्हीं रिश्तों से ।
नींद भी बेरहमी से
ये रिश्ते ही उड़ाते हैं
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X