टूटे हुए सपनों की सुने कौन आहट,
सब कुछ हाथों से छूट गया है सुने कौन आहट ।
सब कुछ अब अंधकार सा लगता है,सब कुछ बेकार सा लगता है।
जो सोचा था वो हुआ नहीं, जो हो रहा हो वो सोचा नहीं
लगता है जैसे उतरे हो मैदान ए जंग मैं बिना तैयारी ।
किसी का कोई साथ नहीं किसी का कोई विश्वास नहीं, बस टूटे सपने ओर टूटा आत्मविश्वास सभी।
नाज़ था जिन सपनों पर कुर्बान कर दिए अपनों पर, क्या पता था कर लेंगे किनारा अपने भी।
किसी ने न सिखाया न बताया न चेताया लड़ना पड़ेगा अकेले जंग ए जिंदगी को,
हार नहीं मानी है उम्मीद लिए चली हूं,
चली हूं अकेले टूटे आत्मविश्वास ओर सपनों को लेकर ।
टूटे हुए सपनों की सुने कौन आहट,
सब कुछ हाथों से छूट गया सुने कौन आहट।
-सपना गौतम
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