है प्राणी विचित्र इस जीवन की अनकही कहानी में,
सबकी पसंद अलग, सबका चरित्र अलग,
सबकी मानसिकता भी अलग है।
कोई नहीं यहाँ एक जैसा,
सबका स्वरूप अलग है।
कभी ना रुकने वाली इस पृथ्वी पर
प्राणी है विचित्र।
कोई बन जाता यहाँ विशेष,
कोई रह जाता यहाँ शेष।
जीवन की इस अजनबी सी कहानी में कौन है अपना एक?
कोई खुशियों के आंगन में झूमता,
तो कोई दुख के बाजार में घूमता है,
फिर भी हर दिल ढूंढता है उस एक अपने को,
शायद इसी का नाम है जीवन।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X