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अधूरे ख़त

                
                                                         
                            आज एक अजनबी से मुलाकात,
                                                                 
                            
उस मोड़ पर हुई जहाँ सारे रास्ते खत्म हो जाते हैं,
वहाँ से एक नई कहानी की शुरुआत हुई,
हर एक पल में खुशियों की बरसात हुई।

उस दिन मैं बहुत दिन बाद हँसी,
उस एक अजनबी की तस्वीर आज भी मेरे हृदय में बसी।

कई मुसाफिर आते हैं मेरी इन भूली-बिसरी राहों में,
लेकिन वह एक नई कहानी लाया था,
एक नई पहेली बुझाने को।

उसकी हर एक हरकत मेरे हृदय को छू गई,
उसकी हर एक झलक मेरे जीवन को ठहर गई।

मेरे हृदय की आस थी,
कि वक्त यहीं पर थम जाए,
वो मेरे साथ यहीं पर रुक जाए।

लगा था सारी उम्र साथ रहेंगे,
पर वो मुसाफिर कब राह छोड़ चला गया,
कारवां गुजरता रहा, ये प्रश्न हृदय में पलता रहा,

जीवन की इस किताब से,
क्यूँ अजनबी से पन्ने,
अधूरे खत बन उड़ जाते हैं,
क्यूँ कोई मुसाफिर दिल में अपना सा एहसास छोड़ जाते हैं...

 
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9 घंटे पहले

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