फ़ायदे में क़ायदा
फ़ायदे में क़ायदा बदला गया।
मेघ द्वारा चाॅंद को निगला गया।।
हर इशारा ग़ैर की ही ओर है।
तीर बनकर दूर तक निकला गया।।
हर कोई उल्फ़त में दागें देखता।
लड़की को देख खुद ही क्यों पिघला गया।।
सच की डगरो पे यहाॅं काॅंटे बहुत।
बेचकर ईमान ही मचला गया।।
झूठ चोरी औ कपट हथियार है।
पा तरक्की की खूब ही उछला गया।।
दर्द होता जब कोई हमको ठगे।
ऐसे पैमानों से ना सॅंभला गया।।
कारवाॅं ये काला चलने वाला है।
दर्द है इसको नहीं कुचला गया।।
अर्ज़ है गोविंद कुछ जल्दी करो।
दहला के आगे यहाॅं नहला गया।।
-संजय गोस्वामी
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