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कह अबोध अपनाकर इसको, मत जहाँ में रह ।

                
                                                         
                            प्रातःकाल उठो बच्चों, ताजी हवा मिलेगी,
                                                                 
                            
लम्बी दौड़ लगाओगे तो,नई स्फूर्ति मिलेगी,
खिल जाएगी अधर कली, सर्दी नहीं लगेगी,
कसरत करने से बच्चों! ठंडक दूर भगेगी ।

थोड़ा सा कसरत कर लेना, तुम्हें निरोग बनाएगा,
ताजी हवा बदन के तेरे, सारे राेम खिलाएगा,
पूरे दिन खुश रहोगे तुम, आलस दूर भगेगी,
सफल कार्य के होने की, नई उम्मीद जगेगी ।

मुर्गा जगता, चिड़िया जगती, भौंरे भी जग जाते हैं,
होत प्रातः बछड़े गायों के, आलस छोड़ रंभाते हैं,
कुकड़ू-कूँ से मुर्गे राजा, जग को रोज जगाते हैं,
मंद पवन के मंथर गति से, तरुवर शीश नवाते हैं ।

तुम तो बुद्धि विवेक सहित, रब की अनुपम कृति हो,
कैसे लक्ष्य हमें पाना है, सदा ही इसकी स्मृति हो,
काम सरल हो जाता है, यदि– बारंबार आवृति हो,
जय चरण को स्वयं चूमता, अंतस में यदि जागृति हो ।

ध्यान लगाओ मालिक का, सबकी सुधि लेता है वह,
तन निरोग, मन निर्मल करता, बल बुद्धि देता है वह,
जल्दी सोना, जल्दी उठना, अच्छी आदत यह,
कह अबोध अपनाकर इसको, मत जहाँ में रह ।।
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एक घंटा पहले

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