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कितनी खुशियां लाई है ।

                
                                                         
                            जगमग-जगमग दीप जले,
                                                                 
                            
ज्यों भू पर तारे निकले ।
लगते कितने सभी भले,
आओ हम सब मिले गले ।।

आज दिवाली आई है,
कितनी खुशियां लाई है ।
हर घर रंग-पुताई है,
देते सभी दुहाई है ।।

कितने सारे बम-पटाखे,
चरखी खूब चलाई है ।
सांप, छछूंदर व फुलझड़ियां,
हमने भी तो लाई है ।।

देखो ! बचकर इन्हें चलाना,
मत अपना तुम हाथ जलाना।
रूठे साथी आज मनाना,
एक दूजे को गले लगाना ।।

आस-पास जो भी निर्धन हैं,
उनके घर भी दीप जलाना ।
दुःख जाए ना कोई दिल,
बच्चों! यूं दीपावली मनाना ।।

निर्धन बच्चों को बांट पटाखे,
उनको लड्डू खूब खिलाना ।
ऊँच-नीच नहीं कोई हममें,
भाई-चारे का दीप जलाना ।।
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एक घंटा पहले

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