नेता अंकल अब क्यों आये,
जब पिछला वादा भूल गए ।
कहा था आपने गांव वालों से,
सड़कें बनवाऊँगा कई नये ।।
पटवा पाये ना एक भी गड्ढा,
उन पुरानी टूटी सड़कों के ।
नौकरी दिलाने का दिया भरोसा,
क्यों दिल तोड़े उन लड़कों के ?
‘पक्के बनेंगे सबके घर’,
क्या हुआ उस वादे का ?
खपरैले भी उजड़ गये, जो
थे बनवाये परदादे का।।
पिछली बार तो आए थे आप,
उन फटे पजामे-कुर्ते में ।
सोने के ये बटन टंके हैं,
आज मखमली कुर्ते में ।।
टूटा चप्पल पहने थे नेता,
पिछले चुनावी दौरे में ।
आज विलायती जूता चमके,
इन टूटे लंगड़े पैरों में ।।
कहाँ-कहाँ से आया इतना,
सारा दौलत आपके पास ?
सारा पैसा हड़प हमारा,
किया गाँव का सत्यानाश ।।
उल्टे पाँव तू आज चला जा,
वरना कपड़े सब होंगे तार ।
एक-एक हड्डी दर्द करेंगी,
पड़ेगी तुमको इतनी मार ।।
गाँव वाले सब सोच लिए हैं,
सब पिछला हिसाब चुकाएंगे।
सीना तान के चलते हो जो,
सिर तेरा आज झुकाएंगे ।।
ढूंढ रहे सब गाँव के बच्चे,
आरती तुम्हारी उतारने को ।
है टूटे चप्पल जुटा के रखीं,
सब औरतें तुझे मारने को ।।
विकास का सारा धन लूटे,
बनवाए अपना वृहद घर ।
इधर भूख से कितने बच्चे,
गए तड़प-तड़प के मर ।।
हद कर दी बेशर्मी की,
आए मांगने फिर से वोट ।
शूट-बूट में पान चबाते,
दीन के दिल पर करते चोट।।
बोला नेता करके हीं-हीं,
‘अबकी जगेंगे सबके भाग।’
ले चप्पल महिलाएं बोलीं–
‘चल भाग लफंगे,भाग।।’
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