बचो धूप से गर्मी में तुम,
वरना होगा तेज बुखार ।
मम्मी-पापा देखो तुमसे,
करते कितना प्यार दुलार ।।
मम्मी-पापा को दुख होता,
जब तुम पड़ते कभी बीमार ।
कभी-कभी वे रोने लगते,
करते इतना तुमसे प्यार ।
धूप सुखा देता है जल को,
जो भी हम सब पीते हैं ।
बचकर रहते धूप से जो भी,
वही तो सुख से जीते हैं ।।
गर्मी में लू चलता है,
जो होता बहुत गरम ।
भू को भी सुखा देती,
तुम तो बहुत नरम ।।
जब भी निकलो गर्मी में,
बच्चों घर से बाहर ।
जी भर के तुम पानी पी लो,
निकलो संग छतरी लेकर ।।
यह सावधानी अगर रही तो,
गर्मी से तुम बचे रहोगे ।
हम अबोध पर बुद्धिमान हैं,
यही बात तुम सभी कहोगे ।।
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