उनकी मौजूदगी से जो तरंगें उठती थीं
उनके बिना भी वो तरंगें क्यों आ आती हैं
बयाँ करेगा क्या-क्या बता संदीप कुँवर
स्वप्निल खयाली में दुनिया ये डूब जाती है
-कुँवर
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