प्रतिदिन प्रतिपल पल-पल परहित,
प्रति ही विचार निज मन में विचारिए
आनंद अमर अति अपने हृदय में,
प्रतिपल पल्लवित पुष्पित पाइये
बांधिए न स्वार्थ के सुवर्ण शीत घेरे में,
रहिये स्वतंत्र हित मित सबको पाइये
बुद्धि विचार यही बसंत बहार यही,
जीवन की बगिया में बजेंगी बधाइयां
स्वार्थ समाप्त हो परमार्थ प्राप्त हो,
बजे हर हृदय में कुँवर शहनाइयां
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