समझें किसे इस नाटक का सूत्रधार
इस पार बैठा है या बैठा है जो उसपार
किसके गिरफ्त में हैं सारे तीर तलवार
किसका किसपर यहां चल रहा है वार
इतना आसान नहीं होता पहुँचना पार
त्यागकर भोग जब करता कोई स्वीकार
- कुँवर संदीप सिंह
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