इसे सुर मेरा या मेरी तान कहो
मुझे जिंदादिल इंसान कहो
चढ़ रहा शुरूर परवान कहो
छायीं खुशियां आसमान कहो
संग सबके अलग इंसान कहो
मिली कृपा दृष्टि भगवान कहो
पूरे हो रहे हैं अरमान कहो
छवि निरखी अलग इसे शान कहो
मुट्ठी में आ रहा आसमान कहो
पूरे जोश से सारे साथ मेरे
मेरा भारत है महान कहो
-संदीप सिंह कुँवर
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X