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जो झटका सा था

                
                                                         
                            सीखा मैंने उससे जो झटका सा था
                                                                 
                            
आगे बढ़ा काम जो अटका सा था
सीखने की राह स्थायी नहीं है
चूकने की कोई भरपाई नहीं है

सीखो झटके से काम सरक जाएगा
अन्यथा सटा हुआ भी दरक जाएगा
मत भागों वहाँ जो जगाए हवस
हर फैलाव का निश्चित होता है बस

झटके की सीख होती तेज और साफ
कर देती है ये आगे का रास्ता साफ
जब झटका लगे उसे मानो अवसर
होगी शकून से आपकी ज़िंदगी बसर
-संदीप सिंह कुँवर
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8 घंटे पहले

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