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धुल जाता है जमीर

                
                                                         
                            पल में धुल जाता है
                                                                 
                            
जमीर आज-कल
बनाने के लिए अपनी
तकदीर आज-कल
लड़ अपनों से जिसको
बनाते हैं अपना
छोड़ते हैं उसे ऐसे ज्यों
सच न हो हो सपना
गैरों में सिमट होंठ पर
जगाते हैं मुस्कान
कैसे कैसे कुदरत तुमने
रचा है ये जहान
-कुँवर संदीप सिंह
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6 घंटे पहले

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